प्रेम-कथा :प्रपत्र शैली (व्यंग्य) : शरद जोशी | Prem-Katha Praptra shaili : Sharad Joshi ke Vyangya

नायक का नाम -श्यामबिहारी शर्मा। कॉलेज में-श्याम शर्मा। (चुनाव के समय नारा था-श्याम प्यारे को वोट दी…

चाँद पर (व्यंग्य) : शरद जोशी | Chand pr : Sharad Joshi ke Vyangya

भारत में विज्ञान के विकास के सरल और संक्षिप्त इतिहास में वह दिन स्वणक्षिरों अथवा ‘चौदह पाइंट बोल्ड’…

एक बैले की तैयारी (व्यंग्य) : शरद जोशी | Ek baile ki taiyari : Sharad Joshi ke Vyangya

बड़े पैमाने पर सरकार और छोटे पैमाने पर जनता को मूर्ख बनाने के लिए मुझे ‘बैले’ की उपयोगिता स्पष्ट नज…

कैसा जादू डाला (व्यंग्य) : शरद जोशी | Kaisa Jadoo dala : Sharad Joshi ke Vyangya

‘बैरन ने ए ए ए !’ गायक ने एक हाथ उठा लम्बा सुर खींचा और झटके से नीचे हाथ ला आगे गाया-’कैसाआ जादू डा…

सारी बहस से गुज़र कर (व्यंग्य) : शरद जोशी | Sari Bahas se gujar kar : Sharad Joshi ke Vyangya

मैं जीवित था और उसके सामने उपस्थित था। उसने मेरे अस्तित्व से इन्कार कर दिया। मैं हूँ और उसके सामने …

पुलिया पर बैठा आदमी (व्यंग्य) : शरद जोशी | Puliya pr baitha Aadmi : Sharad Joshi ke Vyangya

वह एक पुलिया पर बैठा हुआ था। इस पूरे क्षेत्र में यही एक जगह उसे बैठने लायक लगती है और वह अक्सर ही य…

वर्जीनिया वुल्फ से सब डरते हैं (व्यंग्य) : शरद जोशी | Virginia Woolf se sab darte hai : Sharad Joshi ke Vyangya

कुछ दिन हुए हमारे शहर में वह मशहूर पिक्चर लगी, जिसका नाम है ‘हू इज़ अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वुल्फ’। सभी…

भगवान और मुर्गा (व्यंग्य) : शरद जोशी | Bhagwan aur Murga : Sharad Joshi ke Vyangya

सुबह हुई। धूप चढ़ी कमर के बेल्ट तक ! और मियाँ अब्बास की दोनों बिटिया रामझरोखे बैठे ताकने-मुस्काने लग…

हिटलर और आँचू तम्बाखूवाला (व्यंग्य) : शरद जोशी | Hitlar aur Aanchu Tambakhuwala : Sharad Joshi ke Vyangya

हिटलर कैसे मर गया, क्यों मर गया ?–यह इस सदी का सबसे बड़ा रहस्य है। शरीर नौ द्वारे का पिंजड़ा है और …