धोबिन को नहिं दीन्हीं चदरिया (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Dhobin ko nhi Dinhi Chadriya ~ Harishankar Parsai ke Vyangya पता नहीं, क्यों भक्तों की चादर मैली होत…

राजनीति का बंटवारा (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Rajniti ka Batwara - Harishankar Parsai ke vyangya राजनीति का बँटवारा से ठजी का परिवार सलाह करने बैठा…

चूहा और मैं (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Chuha aur Mai - Harishankar parsai ke vyangya चूहा और मैं यह कहानी स्टीन बेक के लघु उपन्यास ‘ऑफ मेन ए…

भारत को चाहिए : जादूगर और साधु (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Bharat ko Chahiye : Jadugar aur sadhu - Harishankar Parsai ke Vyangya in Hindi  हर 15 अगस्त और 26 जन…

तीसरे दर्जे के श्रद्धेय (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Tisre Darze ke Shraddheya - Harishankar parsai ke vyangya बुद्धिजीवी बहुत थोड़े में सन्तुष्ट हो जाता …

लघुशंका न करने की प्रतिष्ठा (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

शे र जब जंगल के किसी कोने में आ जाए, तो चीता बकरी से पूछता है, “बहनजी, साहब के स्वागत के लिए और क्य…

अकाल-उत्सव (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

आकाल उत्सव / Aakal Utsav - Harishankar Parsai ke vyangya दरारों वाली सपाट सूखी भूमि नपुंसक पति की सन…

वैष्णव की फिसलन (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

Vaishnav ki fislan - Harishankar parsai vyangya वैष्णव करोड़पति है। भगवान विष्णु का मन्दिर। जायदाद लग…

प्रेम-कथा :प्रपत्र शैली (व्यंग्य) : शरद जोशी | Prem-Katha Praptra shaili : Sharad Joshi ke Vyangya

नायक का नाम -श्यामबिहारी शर्मा। कॉलेज में-श्याम शर्मा। (चुनाव के समय नारा था-श्याम प्यारे को वोट दी…

चाँद पर (व्यंग्य) : शरद जोशी | Chand pr : Sharad Joshi ke Vyangya

भारत में विज्ञान के विकास के सरल और संक्षिप्त इतिहास में वह दिन स्वणक्षिरों अथवा ‘चौदह पाइंट बोल्ड’…

एक बैले की तैयारी (व्यंग्य) : शरद जोशी | Ek baile ki taiyari : Sharad Joshi ke Vyangya

बड़े पैमाने पर सरकार और छोटे पैमाने पर जनता को मूर्ख बनाने के लिए मुझे ‘बैले’ की उपयोगिता स्पष्ट नज…