सौन्‍दर्य के उपासक (कहानी) : गजानन माधव मुक्तिबोध / Saundarya Ke Upasak : Muktibodh ki Kahani

कोमल तृणों के उरस्‍थल पर मेघों के प्रेमाश्रु बिखरे पड़े थे। रवि की सांध्‍य किरणें उन मृदुल-स्‍पन्दि…

प्रश्‍न (कहानी) : गजानन माधव मुक्तिबोध / Prashna : Muktibodh ki Kahani

एक लड़का भाग रहा है। उसके तन पर केवल एक कुर्ता है और एक धोती मैली-सी! वह गली में भाग रहा है मानो हज…

ज़िन्दगी की कतरन (कहानी) : गजानन माधव मुक्तिबोध / Zindagi Ki Katran : Muktibodh ki Kahani

नीचे जल के तालाब का नज़ारा कुछ और ही है। उसके आस-पास सीमेण्ट और कोलतार की सड़क और बँगले। किन्तु एक …

जंक्‍शन (कहानी) : गजानन माधव मुक्तिबोध / Junction : Muktibodh ki Kahani

रेलवे स्‍टेशन, लंबा और सूना! कड़ाके की सर्दी! मैं ओवरकोट पहने हुए इत्‍मीनान से सिगरेट पीता हुआ घू…

विपात्र (लघु उपन्यास) : गजानन माधव मुक्तिबोध

[1] लम्बे-लम्बे पत्तोंवाली घनी-घनी बड़ी इलायची की झाड़ी के पास जब हम खड़े हो गए तो पीछे से हँसी का ठ…