ख़ुशिया (कहानी) : सआदत हसन मंटो | Khushiya by Manto

ख़ुशिया सोच रहा था। बनवारी से काले तंबाकू वाला पान लेकर वो उस की दुकान के साथ उस संगीन चबूतरे पर बैठा…

दस रुपए (कहानी) : सआदत हसन मंटो | Das Rupye by Manto

वो गली के उस नुक्कड़ पर छोटी छोटी लड़कीयों के साथ खेल रही थी। और उस की माँ उसे चाली (बड़े मकान जिस में…