अर्जुन की विद्यानिष्ठा (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -20)

आख़री कथा में हमने देखा कि किस प्रकार द्रोणाचार्य ने राजकुमारों को अपनी छत्रछाया में लेकर उन्हें शस…

द्रोण बने द्रोणाचार्य (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -19)

अब द्रोण कृपी के साथ गृहस्थाश्रम में रह रहे थे, तो एक व्रतस्थ ब्राह्मण होने के कारण उन्होंने निष्का…

कृप, द्रोण और अश्वत्थामा का जन्म (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -18)

गौतम ऋषि का शरद्वत नामक एक पुत्र था। जब शरद्वत का जन्म हुआ था, तो वह अपने हाथों में बाणों को लेकर …

पांडवों का जन्म (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -17)

धृतराष्ट्र के विवाह के बाद, भीष्म ने पांडु शादी की योजना बनाना शुरू कर दिया। पांडु के लिए पत्नी के …

कौरवों का जन्म (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -16)

जब धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर यह तीन लड़के बड़े हो गए, तो हस्तिनापुर के सिंहासन पर पांडु को राजा क…

यमराज को शाप (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -15)

बहुत पहले, मांडव्य नाम के एक महान ऋषि अपनी कुटिया में रहकर तपस्या करने में व्यस्त थे। उन्होंने कई स…

भीष्म का जन्म (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -13)

यह कथा तब की है, जब महाभिष नाम का राजा पृथ्वी पर राज्य करता था। महाभिष बहुत ही शूरवीर राजा था, उसे स…

परिक्षित को शाप (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ -4)

परीक्षित अर्जुन का पौत्र था। अपने दादा की तरह ही, वह एक महान धनुर्धर और एक शक्तिशाली योद्धा था। एक …

रुरु और प्रमद्वरा (महाभारत की अनसुनी कहानियाँ - 2)

पिछली कहानी में हमने पढ़ा की च्यवन ऋषि का जन्म कैसे हुआ था। इस कहानी का मुख्य नायक रुरु च्यवन ऋषि का…