और मुंबई जल उठा (विज्ञान गल्प) : जयंत विष्णु नार्लीकर

हड़बड़ाहट के साथ राजेश की नींद खुल गई। वह पसीने में नहाया हुआ था। मौसम हालाँकि गरम और उमस भरा था, प…

हिमयुग की वापसी (विज्ञान गल्प) : जयंत विष्णु नार्लीकर

भाग -1 ‘‘पा पा, पापा ! जल्दी उठो। देखो, बाहर कितनी सारी बर्फ है! कितना अच्छा लग रहा है!’’  राजीव श…