एक और गाँधी - (सुशोभित)

गाँधी, विवेकानंद, श्रीअरविंद : 20वीं सदी में तीन भिन्न क्षेत्रों में, तीन भिन्न कालखंडों के दौरान, …

स्वामी और महात्मा - (सुशोभित)

स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी की भेंट होते-होते रह गई थी। गाँधीजी उनके दर्शन करने पहुँचे थे, कि…

राजघाट में क्या रखा है - (सुशोभित)

राजघाट जाकर मुझको अचरज ही हुआ। यह अचरज बुद्धि में दर्ज हुआ, जैसे पाठशाला की हाज़िरी। हृदय में भावन…

एक बिरला भवन - (सुशोभित)

भारतभूमि का सर्वप्रमुख गाँधीधाम तो साबरमती आश्रम ही है। फिर सेवाग्राम की बारी आती है। पोरबंदर, राजक…

साबरमती से सेवाग्राम - (सुशोभित)

12 मार्च, 1930 को जब गाँधीजी नमक सत्याग्रह के लिए साबरमती से डांडी की ओर चले, तो उसके बाद फिर लौटकर…

लोकदेव और महात्मा - (सुशोभित)

पण्डित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के उपरांत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी पुस्तक ‘लोकदेव …

चरखा और गुलाब - (सुशोभित)

गाँधी और नेहरू के युगपत् पर एकाग्र किसी भी पुस्तक का इससे सुंदर शीर्षक भला और क्या हो सकता है- ‘चरख…

लेखकों के लेखक - (सुशोभित)

दिल्ली में प्रतिवर्ष होने वाले विश्व पुस्तक मेले में वर्ष 2020 के आयोजन की थीम थी- गाँधी : द राइटर्…

हिन्द स्वराज - (सुशोभित)

गाँधी ने अपनी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ एक जहाज़ पर लिखी थी। वे लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौट रहे थे। लंबी…

बापू की बोली - (सुशोभित)

आशीष नंदी ने गाँधी और नेहरू की अंग्रेज़ी पर टिप्पणी करते हुए बड़ी सुंदर बात कही थी। उन्होंने कहा था…

गाँधीवादी कल्पनाशीलता - (सुशोभित)

समाजशास्त्री शिव विश्वनाथन ने गाँधीजी पर बात करते हुए एक बहुत सुंदर शब्द का उपयोग किया था- गाँधियन …

गाँधी होना कठिन है - (सुशोभित)

गाँधी होना कठिन है, गाँधीवादी होना सरल। अलबत्ता जिस दिशा में सामूहिक अवचेतन इन दिनों प्रवृत्त हो रह…

गाँधी की सुंदरता - (सुशोभित)

रिचर्ड एटेनबरो की फ़िल्म ‘ गाँधी ’ का रिव्यू लिखते हुए विष्णु खरे ने कहा था- “गाँधीजी कभी भी सौंदर्य …

गाँधी का विलाप - (सुशोभित)

कस्तूरबा की पार्थिव देह के निकट शोकसंतप्त गाँधीजी का चित्र बहुत विकल करता है। यह 22 फ़रवरी, 1944 है।…

गाँधी-टोपी - (सुशोभित)

2 जनवरी 1948 को दिल्ली में पानी बरसा था और बिड़ला हाउस में भी रिमझिम थी। उस दिन, यानी मृत्यु से 28 …

गाँवों के गाँधी - (सुशोभित)

ग्राम-स्वराज गाँधीजी का केंद्रीय विचार था। इसमें उनकी मूलभूत तर्कणा की कुंजी भी थी। उनके चिंतन में …

गाँधी का सत्याग्रह - (सुशोभित)

“सच्चे अधिकार तो फ़र्ज़ के फल हैं।” [ ‘हिन्द स्वराज’ ] वंश-परंपरा का भी कोई-न-कोई महत्त्व तो होता ही…

गांधी की सुंदरता (सुशोभित) ऑनलाइन पढें | Gandhi ki Sundarta PDF

पहला पन्ना इतिहासकार बलराम नंदा ने ‘इन सर्च ऑफ़ गाँधी’ में लिखा है- “30 जनवरी, 1948 की शाम मैं फ़िरोज…

गाँधी का स्वराज्य - सुशोभित

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने अपनी पुस्तक ‘मेरी जीवन यात्रा’ के दूसरे खंड में लिखा है- “गाँधीजी ने शुरू…