कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया | Kuchh Ishq kiya, Kuchh Kaam kiya PDF Download Free by Piyush Mishra

 

पुस्तक नाम :कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया | Kuchh Ishq kiya, Kuchh Kam kiya
Book Language :हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ :2.9 MB
  • कुल पृष्ठ :102
  • श्रेणी:शायरी, कविता-संग्रह

    दो शब्द
    'कुछ इश्क किया कुछ काम किया'- ये मिसरा स्व. फैज़ साहब की मशहूर नज़्म का हिस्सा है । जिन्दगी पे इतना फबा कि हक़ से चुरा लिया’ !
    ऊपर जा के फैज़ साहब से मुआफ़ी माँग लूँगा।
    जिन्दगी बड़ी बलबलाती रही ! खूखार...लुभावनी...नमकीन..
    कराहती- चुटीली..फिर ठहाके...फिर दोहत्थड़...फिर परेशानी...फिर सवालात...फिर नाउम्मीदी...फिर रोशनी...फिर शायद जवाब...लेकिन आधे-अधूरे और फिर मदहोशी... | यानी कि कहाँ जा रहे हैं.. कुछ होश नहीं । लेकिन कुल मिलाकर भरपूर या यों कहें कि पूरी तरह से 'पूरी’ |
    वाकई शिकायत नहीं कर सकता।
    ‘स्ट्रगल' उससे भी मजेदार रहा । रोटी के पैसे नहीं थे... चिकन खाया । देसी के लाले पड़े थे....प्रीमियम व्हिस्की पी । बस की औकात नहीं थी...ऑटो में बैठे! और मकान का  किराया नहीं था तो फाइव स्टार्स से नीचे कभी भाई लोगों ने जाने नहीं दिया ! सब यारों की मेहरबानी... ।
    अतुल गुप्ता, अरुण मोटा, गौतम चड्ढा और प्रशान्त । इस दौर के लिए हमेशा याद आओगे।
    रिची, राज भरत, ऐवन रिबैलो और जे.बी. सिंह । बड़े ख़राब दौर में मिले थे यार ! बहुत सँभाला ! ये 2005 के बाद की जिन्दगी तुम्हारी ही दवाओं और दुआओं की देन है । धन्यवाद छोटा शब्द पड़ेगा, बाक़ी कम-से-कम सौ साल जियो राहुल गांधी । (वो वाले राहुल गांधी' नहीं... हा-हा-हा!) और मेरी जिन्दगी के सबसे पहले परिवार — एक्ट वन ! आर्ट ग्रुप ! ' अगर तुम नहीं मिलते तो मैं कब का अल्लाह का प्यारा हो चुका होता।
    आखिरी में स्वर्गीय प्रवेश साहनी । बहुत जल्दी चला गया यार! तेरी ये जाने की उम्र नहीं थी।
    होश आया तो सिर्फ इबादत की वजह से । उससे सन्तुलन मिला ।
    आज ठहराव है। सारे सवालों के जवाब नहीं मिले.. लेकिन उम्मीद और भरोसा बहुत बढ़ चला है । अकेलापन कभी अभिशाप लगता था। आज वरदान है। मौन से... चुप्पी से... खामोशी से प्यार हो चला है । लोगों से खामखा क्यों मिलें, इसकी वजह खोजने पर भी नहीं मिलती... | बाक़ी योग, ध्यान, विपश्यना! जिन्दाबाद !
    पहले उघड़ा बचपन...फिर बेतरतीब जवानी..फिर खूखार थियेटर, फिर लुभावना सिनेमा और अन्त में प्रार्थना... | आगे क्या हो, इसकी तलाश जारी है । जिन्दगी में यही सीख मिली कि ‘स्वीकार' कर लेना चाहिए! वे खुद के पाप हों या दूसरों के । सुकून मिलना शुरू हो जाता है।
    Kuch Ishq Kiya kuch Kaam Kiya Flipkart, Kuch Ishq Kiya Kuch Kaam Kiya MP3, Kuch Ishaq Kiya Kuch Kaam Kiya pdf download free, Piyush Mishra books