अहंकार बुरी चीज़ है (प्रेरणादायक कहानी)

 


एक तालाब में दो मगरमच्छ रहते थे । एक मेढक से उनकी दोस्ती हो गयी । मेढक को यह नहीं पता था की इन दोनों मगरमच्छ में एक मंद बुद्धि है और दुसरे को अपने बुद्धि पर काफी अहंकार है ।


एक दिन वे तीनो तालाब के किनारे बैठे बातचीत कर रहे थे की एक शिकारी हाथ में जाल और सिर पर बहुत सी मछलियाँ रखे आया और तालाब की ओर देखकर बोला,


“यहाँ तो काफी मछलियाँ हैं, इन्हें कल आकर पकड़ूँगा ।”


शिकारी के जाने के पश्चात तीनो मित्र सोच में पर गए । मेढक और मंद बुद्धि मगरमच्छ बोले,


“हमें यहाँ से भाग जाना चाहिए ।”


लेकिन अहंकार से भरा तेज बुद्धि मगरमच्छ बोला ,


“नहीं हम यहाँ से नहीं भागेंगे । प्रथम तो वो आएगा ही नहीं और यदि आ भी गया तो मैं अपनी ताकत और बुद्धि से तुम्हारी रक्षा करूँगा ।”


मंद बुद्धि ने अपने मित्र की बात सुन झट से कहा ,


“हाँ....हाँ, मेरा मित्र ठीक कहता है । यह शक्तिशाली है तभी तो इसे इसका अहंकार है । ठीक ही कहा जाता है की बुद्धिमानो के लिए कोई ऐसा कोई ऐसा कार्य नहीं, जिसे वो न कर सके । देखो सशस्त्र नन्दों का चाणक्य ने अपनी बुद्धि द्वारा नाश कर दिया । जहाँ पर रवि की किरण और वायु नहीं पहुँच सकते वहां पर बुद्धि पहुँच जाती है, इसीलिए हम यहाँ से भागकर कहीं भी नहीं जायेंगे ।”


मेढ़क उन दोनों की बातें सुनकर बोला,


“मित्रो, मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ । और इसलिए मैं आज ही अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर भाग रहा हूँ ।”


यह कहकर मेढ़क वहां से चला गया ।


दुसरे दिन सुबह ही शिकारी वहां आया । उसने अपना जाल लगाकर दोनों मगरमच्छ को पकड़ लिया । उनका अहंकार और मंद बुद्धि ही इन्हें ले डूबा ।


इसलिए कहा भी गया है की सच्चे मित्र की सलाह को कभी नहीं ठुकराना चाहिए ।


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